*मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति भी हमारे समाज का अंग -डी पी सिंह उप जिलाधिकारी पट्टी*

 

पट्टी, प्रतापगढ़।उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्लान आफ एक्शन एवं जिला जज श्री संजय शंकर पाण्डेय जी के आदेश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री नीरज कुमार त्रिपाठी जी के निर्देश के क्रम में  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पट्टी में आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें  लोगों को संबोधित करते हुए उप जिलाधिकारी पट्टी श्री डी पी सिंह  जी ने कहा कि व्यक्तियों का मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है, क्योंकि जब वह मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे तो वह अपने कार्यों को बेहतर ढंग से कर पाएंगे, किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी पर मानसिक रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति भी हमारे समाज का अंग है। इस अवसर पर तहसीलदार पट्टी श्रीमती श्रद्धा पाण्डेय  जी सचिव तहसील विधिक सेवा समिति ने कहा कि आज हमारे देश में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जरूरत है उन्हें समय पर परामर्श एवं सही इलाज की जिसके माध्यम से मानसिक रोगी स्वस्थ होकर एक अच्छे नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर सकें, उन्होंने बताया कि मानसिक रोगियों को कानून से संरक्षण प्रदान किया गया है ,जिसके क्रम में मानसिक रोगियों को जहां निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, वहीं प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की बात कानून में की गई है ।अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पट्टी नीरज सिंह ने कहा कि सामान्य बीमारी की तरह ही मानसिक रोग भी है, जरूरत है मानसिक रोग को पहचान कर उस पर पहल करने की और मानसिक रोगियों के साथ सही बर्ताव करने की। घबराहट आने पर, चक्कर आने पर या किसी कारण बस मानसिक परेशानी होने पर चिकित्सक से संपर्क करने की आवश्यकता है ,अंधविश्वास से दूर रहने की आवश्यकता है ,आज के दौर में पढ़े लिखे लोग भी मानसिक अस्वस्थता के शिकार हो रहे हैं ,उन्होंने बताया कि इस तरीके की समस्या पर मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एम पी शर्मा 94159 86484 जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़ से संपर्क किया जा सकता है ।इस अवसर पर राम प्रकाश पाण्डेय पीएलवी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मानसिक स्वास्थ्य एवं देखभाल अधिनियम 2017 के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के लिए जहां निशुल्क इलाज की बात की गई है, वहीं प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हो, बीमार व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। बीमार व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता।मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के परिवार की जिम्मेदारी है कि उसकी देखभाल करें। भारतीय दंड संहिता की धारा 309 में संशोधन किया गया ,इसमें आत्महत्या की कोशिश जो अपराध माना जाता था ।मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 के अंतर्गत उसे मानसिक बीमारी की श्रेणी में रखा गया हैै। । इस अवसर पर पैनल अधिवक्ता इंद्रप्रसाद  तिवारी द्वारा लोगों को निशुल्क विधिक सहायता के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर आरती देवी, दीक्षा तिवारी, सोना गुप्ता ,अमृता देवी ,अनुराधा आदि लोग मौजूद रहे