शिक्षा का प्रमुख केन्द्र रहे विद्यालय की कराह रही आत्मा

 

लार – विकास खण्ड लार का वह विद्यालय जो दशकों से पूल्यपरक शिक्षा का प्रमुख केन्द्र हुआ करता था,आज अपने बदतर हालात पर दुर्दशा के आंसू रो रहा है।एक समय था जब शाम ढलते ही क्षेत्र का कोई ऐसा गांव या गली नहीं होती थी जहां इस विद्यालय के महान गुरूओं की पदचापों की ध्वनि न सुनाई दे।इस विद्यालय ने डा सौरभ मालवीय,डा शैलेश द्विवेदी,डा संजीवनी आनंद जैसा मुर्धन्य विद्वान और मिथिलेश द्विवेदी जैसा दिग्गज पत्रकार दिया है।मनीष सिंह,देव सिंह,ममता द्विवेदी,अनूप पाठक,सुधेन्द्र पाण्डेय,रश्मि पाण्डेय जैसा कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक दिया है,दिगम्बर द्विवेदी,प्रियेश त्रिपाठी,जैसा अधिवक्ता दिया है,उमेश विश्वकर्मा जैसा प्रसिद्ध व्यवसायी दिया है,उस विद्या के मंदिर की कारूणिक दशा देखकर पूर्व में वहां शिक्षा प्राप्त कर चुके हर शिक्षार्थी का हृदय द्रवित हो जाता है,दूरभाष पर वार्ता करने पर विद्या मंदिर के पूर्व छात्र हिमांशु सिंह (शोध छात्र, लखनऊ विश्वविद्यालय )ने कहा कि हम सभी के रहते अगर अपना विद्यालय जिसमें पढ़कर हम सभी आगे बढ़े हैं उस विद्यालय की आज यह दशा है कि वहां दस बच्चे भी नहीं पढ़ते तो लानत है हमारे पुरुषार्थ पर,क्षेत्र के सबसे श्रेष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ किसान त्रिभुवन प्रताप सिंह ने कहा कि जब तक पण्डित राधेश्याम द्विवेदी (पूर्व प्रधानाचार्य गौतम इण्टर कालेज पिपरा रामधर) चेतना में रहे और विद्यालय के संरक्षक रहे इस विद्यालय की सूर्य पताका चारों दिशाओं में फैलती थी लेकिन द्विवेदी जी के दिवंगत हो जाने के बाद कोई कर्तव्यनिष्ठ संरक्षक ऐसा नहीं मिला जो इस सस्थान की निस्वार्थ सेवा कर सके,पहले नगर के कई बड़े व्यवसायी भी इस संस्थान को अपना सहयोग देते थे लेकिन विद्यालय प्रबंधन की उदासीनता के कारण उन्होंने भी सहयोग करना बन्द कर दिया,पूर्व छात्र पेशे से शिक्षक और समाजसेवी देव सिंह,और मनीष सिंह,डब्बू सिंह आदि पुरातन छात्र परिषद का गठन करके लोगों से आगे बढ़कर इस संस्थान को पुनर्जीवित करने का किया है। छात्र शासकीय अधिवक्ता देवरिया नवनीत मालवीय का कहना है कि देश के सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिये ऐसे विद्यालयों को पुनर्जीवित करना आवश्यक है।