यूपी/ बलिया मनियर श्री स्वामीनाथ सिंह सुरेंद्र महाविद्यालय के परिसर में विश्व योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक व सेविकाओं द्वारा ‘वर्तमान जीवन शैली में भारतीय योग की प्रासंगिकता’ विषयक विचारगोष्ठी व योगाभ्यास का आयोजन कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सीमित संख्या में आमंत्रित अतिथिगण की उपस्थिति में किया गया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता शिक्षाविद डॉ विद्यासागर उपाध्याय ने कहा कि हजारों वर्षों से योग व आयुर्वेद था , आज भी है और कल इसको संसार का जन-जन अपनायेगा । दुनिया अब योग व आयुर्वेद के लाभ को जान चुकी है । इसलिए इसके प्रभाव को षड़यंत्रों से दबाया नहीं जा सकता।योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है ,बल्कि आज के भाग दौड़ भरी जिंदगी में मानसिक संतुलन बनाये रखने का सर्वाधिक सशक्त माध्यम भी है।योग विज्ञान है, जो जीवन जीने की कला तो है ही, साथ ही यह पूर्ण चिकित्सा पद्धति है।योग के महत्व पर श्वेताश्वतर उपनिषद में वर्णित किया गया है कि-न तस्य रोगो न जरा न मृत्युः।प्राप्तस्य योगाग्निमयं शरीरम्।। अर्थात् योगाग्निमय शरीर को प्राप्त कर लेने वाला योगी के शरीर में न तो रोग उत्पन्न होते हैं, न बुढ़ापा आता है और न ही उसकी मृत्यु होती है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है ‘‘योग: कर्मसु कौशलम्’’ अर्थात् योग से कर्मों में कुशलता आती है। भारत के षट् दर्शनों में महर्षि पतंजलि का योग दर्शन बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। योग शब्द की परिभाषा महर्षि पतंजलि ने अपने योग सूत्र में ‘योगश्चितवृत्ति निरोध:’ के रूप में दी जिसका अर्थ होता है चित्त की वृत्तियों के निरोध को योग कहते हैं। व्यावाहरिक स्तर पर योग शरीर, मन और भावनाओं में संतुलन और सामंजस्य स्थापित करने का एक साधन है। मनुष्यजाति को अब और आगे प्रगति करना है तो योग सीखना ही होगा। अंतरिक्ष में जाना है, नए ग्रहों की खोज करनी है,शरीर और मन को स्वस्थ और संतुलित रखते हुए अंतरिक्ष में लम्बा समय बिताना है तो विज्ञान को योग की महत्ता को समझना होगा क्योंकि योग भविष्य का धर्म और विज्ञान दोनो है।भविष्य में योग का महत्व और भी बढ़ेगा। यौगिक क्रियाओं से वह सब कुछ बदला जा सकता है जो हमें प्रकृति ने दिया है और वह सब कुछ पाया जा सकता है जो हमें प्रकृति ने नहीं दिया है।मानव अपने जीवन की श्रेष्ठता के चरम पर अब योग के ही माध्यम से आगे बढ़ सकता है, इसलिए योग के महत्व को समझना होगा। तनावजनित रोग यथा अवसाद,उच्च रक्तचाप,मधुमेह इत्यादि व्याधियों से बचते हुए आनंदमय जीवन जीने के लिए योग की शरण मे आना होगा।योग का अर्थ ही है जोड़ अर्थात जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है और मोक्ष का साधन बनता है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ पी के तिवारी ने कहा कि समस्त स्वयं सेवक व सेविकाओं द्वारा इस कोरोना महामारी में जनसेवा का जो अद्भुत कार्य किया गया वह पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है।अब एक बार पुनः सब लोग गांव,गली,मोहल्ले में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को कोविड टीकाकरण हेतु प्रेरित करें।जुलाई के प्रथम सप्ताह में वन महोत्सव प्रस्तावित है जिसमे महाविद्यालय परिवार द्वारा कमसे कम पांच सौ पौधे लगाने हैं ,इसमें भी आप सबका सहयोग अपेक्षित है। कार्यक्रम को सर्वश्री अश्वनी सिंह,राजकुमार मल,वृजेन्द्र श्रीवास्तव,कामेश्वर प्रसाद,ऋचा यादव,सकीना ख़ातून, निशा प्रसाद,आरती,कुदरत अंसारी,चंदन कुमार ,ने सम्बोधित किया।अध्यक्षता महाविद्यालय के संस्थापक इंजीनियर सुरेंद्र सिंह तथा संचालन कार्यक्रम अधिकारी सुनील कुमार ने किया।अंत मे समस्त आगन्तुकों के प्रति महाविद्यालय के व्यवस्थापक आदित्य प्रताप सिंह ने आभार व्यक्त किया।