सपा नेता सूर्यभान सिंह ने गांव का भर्मण लिखा मुख्यमंत्री को पत्र , प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी से लिया समस्या का संज्ञान ।

शैलेश सिंह

बैरिया(बलिया) आजादी के की दशक बीत चुका है परन्तु विकाखंड मुरली छपरा के ग्राम पंचायत चांददियर अंतर्गत फिरंगी टोला ( गोड़ बस्ती ) मे आज तक एक भी विकास की किरण नहीं पहुंच सकी है। बिजली, पानी, सड़क, जल निकासी की समस्या सहित अनेक समस्याएं जस की तस है। गांव में विद्युतीकरण के लिए खम्भे तो लगाए गए हैं लेकिन उस पर आज तक तार नहीं लगा ,मशलन आज भी लोग ढिबरी युग मे लोग अपना जीवनयापन को मजबूर है । सपा के वरिष्ठ नेता समाजसेवी सूर्यभान सिंह ने जब कीचड़ में चलते हुए इस अपने क्षेत्र भ्रमण के दौरान इस गांव में पहुँचे तो वह भी ग्रामीणों की शिकायत सुन दंग रह गये । उन्होंने ग्रामीणों से प्रार्थना पत्र लिखवा कर मुख्यमंत्री कार्यालय को तत्काल प्रेषित कर दिया। प्रार्थना पत्र का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी बलिया को आदेशित किया है कि परीक्षणोंपरान्त जनहित में समस्या का निराकरण करा कर अविलंब अवगत कराएं।

क्षेत्र भर्मण पर पहुँचे सपा नेता को ग्रामीणों ने बताया कि विकास खंड मुरली छपरा अन्तर्गत चांददियर का पूर्वा फिरंगी टोलाला गोड़ बस्ती आज भी बिकास के मूलभूत सुविधाओं से महरूम है। आज तक उस बस्ती में सड़क, पेयजल, बिजली और गांव में से जल निकासी की समस्या आदि जस की तस पड़ी हुई है। चुनाव के समय तमाम जनप्रतिनिधि आए और गए कईयों ने भरोसा भी दिलाया लेकिन उक्त समस्या पर किसी ने घ्यान देना उचित नही समझा। बरसात का दिन आने पर गांव से जल निकासी ना होने के चलते बस्ती मे काफी जल जमाव हो जाता है और काफी दिनों तक जमा रहता है , ऐसे मे संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका प्रबल रहती है।
ग्रामीणों ने सपा नेता को बताया कि 6 वर्ष पूर्व विद्युतीकरण के लिए बिजली का खंभा लगाया गया था लेकिन उस पर अभी तक तार नहीं लगाया जा सका है। विद्युत ट्रांसफार्मर का तो दूर-दूर तक अता-पता नही है । फिरंगी टोला निवासी धूमराज गोड़,छठू लाल, रामाश्रय, संतोष कुमार, हीरालाल, हरे राम, संजय कुमार, जितेंद्र, सत्येंद्र, सुनील, भजन, राजकिशोर, अर्जुन तथा रामराज गोड़ आदि ने सपा नेता सूर्यभान सिंह को कीचड़ में चल कर अपने गांव पहुँचने पर आभार प्रगट करते हुए कहा कि आप स्वयं महसूस कर चुके होंगे कि बरसात के मौसम में किस कदर हम परेशानियों को झेलते है । हमारे गांव से किसी भी मरीज अथवा गर्भवती महिलाओं को मुख्य सड़क तक ले जाना कितना जोखिम भरा है ?