शैलेश सिंह

बैरिया , बलिया : स्थानीय थाना क्षेत्र के ग्राम इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगावा) में मंगलवार को गायों के झुंड ने एक अधेड़ व्यक्ति की सिंह और पैरों के टॉप से मार-मार कर जान ले ली।इस हृदयविदारक घटना को सैकड़ो लोग देखते रहे और बहुत प्रयास किये कि गायों को किसी तरह भगा दिया जाय, परन्तु गायों का रुख इतना खूंखार और हिंसक था कि कोई भी व्यक्ति नजदीक सटने का हिम्मत नही जुटा सका ।
प्राप्त समाचार के अनुसार उक्त पंचायत के बड़का सुफल टोला निवासी किशोर बिंद (55) मंगलवार को सुबह में शौच के लिए बाहर जा रहे थे। वह दुर्गा मंदिर के पास के गुजर रहे थे कि तभी वहां बैठीं दर्जनों आवारा गायों ने उन पर हमला बोल दिया। वह वहीं जमीन पर गिर छटपटाने लगे। शोर सुनकर आसपास के लोग सैकड़ों की संख्या में आ गये और गायों के भगाने के लिये काफी प्रयास किये,परन्तु गायें काफी खूंखार मूड में थी और वह बेखौब उक्त व्यक्ति पर सिंह और पैरों की टॉप से प्रहार करती रही , व्यक्ति जब अधमरा हो गया तब कहीं गायें हट सकी । घायल व्यक्ति को ग्रामीणों ने सीएचसी सोनबरसा ले जाया जा रहे थे लेकिन रास्ते में ही व्यक्ति ने दम तोड़ दिया। इस घटना से गांव के लोग अवाक हैं। मृतक को आठ पुत्रियां हैं, कोई पुत्र नहीं हैं। घटना के बाद उनका पूरा परिवार बेसहारा हो चला है।

सपा नेता सूर्यभान ने मृतक के परिजनों की दिए 20 हजार रुपये

इस घटना के बाद बेसहारा परिवार को क्षेत्र के प्रसिद्ध समाजसेवी व सपा नेता सूर्यभान सिंह ने मौके पर पहुँच कर 20 हजार की सहयोग राशि दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी तौर पर भी ऐसे परिवार की मदद होनी चाहिए। मृतक के परिवार का अब कोई सहारा नहीं है।

आवारा पशुओं के आतंक से कई गांवों में व्याप्त है दहशत
ये गायें गांव के एक मठिया पर एक साधु जी ने पाला था , परन्तु पिछले वर्षों अठगावा में हुई सरयू नदी के भयंकर कटान में मठिया का अस्तित्व पूरी तरह नदी में बिलिन हो गया , तब से उक्त गायों का झुण्ड का न तो कोई आश्रय रहा और न ही कोई आश्रयदाता । मशलन ये पशु एक झुण्ड के शक्ल में गांव के आस-पास ही रहने लगे और मनमानी तरीके से किसी के खेत या नाद में अपना पेट भरने लगे अगर कोई किसान इनका प्रतिकार करता तो ये संयुक्त रूप से उस पर टूट पड़ते है । इनके झुण्ड का इतना कहर और दहशत व्याप्त है कि अन्य गाँव मे भी खड़ी फसल को चरते है और किसान कुछ भी नही कर पाता । इनकी हिंसक प्रवृत्ति का अब तक कई अन्य लोग भी शिकार हो चुके है । योगी सरकार ने बेसहारा पुशओं के लिए गो आश्रय केंद्र की व्यवस्था की है। इसके पीछे सरकार की मंशा यह थी कि इन पुशओं सेे किसानों को कोई नुकसान न हों लेकिन बलिया में कोई ऐसा गांव नहीं हैं जो बेसहारा पशुओं से मुक्त हैं। किसान ऐसे पशुओं से तंग हैं, लेकिन अधिकारी दावा कर रहे हैं कि सभी बेसहारा पशुओं को उन्होंने गो आश्रय केंद्रों में डाल दिया है लेकिन अठगांवा और आस-पास गांवों में इनका कहर आज भी बदस्तूर जारी है।