प्रेम कुमार त्रिपाठी की कहानियाँ आधुनिकता की अंधी दौड़ में सुकून प्रदान करने वाली हैं–अनिल प्रताप त्रिपाठी

दो मुट्ठी चावल कहानी संग्रह का हुआ लोकार्पण__

प्रतापगढ ।नगर के पूरे ईश्वर नाथ में सृजना साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में साहित्यकार प्रेम कुमार त्रिपाठी प्रेम द्वारा रचित कहानी संग्रह दो मुट्ठी चावल का लोकार्पण हुआ। अध्यक्षता करते हुए समीक्षक-साहित्यकार डाॅ०दयाराम मौर्य ‘रत्न’ ने कहा कि प्रेम कुमार त्रिपाठी प्रेम की कहानियाँ भूले-भटके समाज को आईना दिखाती हैं। प्रेमचन्द की कर्मभूमि रही बेल्हा की धरती पर प्रेम कुमार त्रिपाठी ने कहानियाँ लिखकर जनपद का गौरव बढ़ाया है। मुख्य अतिथि अनिल प्रताप त्रिपाठी ने कहा कि प्रेम कुमार त्रिपाठी की कहानियाँ आधुनिकता की अंधी दौड़ में सुकून प्रदान करने वाली हैं।विशिष्ट अतिथि रोशनलाल ऊमर वैश्य ने प्रेम कुमार त्रिपाठी की 24 कहानियों की तुलना राष्ट्रीय ध्वज में बने अशोक चक्र की 24 तीलियों से की। ‘दो मुट्ठी चावल’ कहानी संग्रह में उत्कृष्ट कहानियों के लेखक प्रेमकुमार त्रिपाठी ‘प्रेम’ को ‘साहित्य गौरव सम्मान’ से नवाजा गया।

कार्यक्रम का आरंभ माँ सरस्वती की मूर्ति पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलित कर किया गया।सरस्वती वंदना तथा संचालन राधेश्याम दीवाना ने प्रस्तुत की।इस अवसर पर प्रेम कुमार त्रिपाठी प्रेम ने कहा कि दो मुट्ठी चावल मेरा तीसरा कहानी संग्रह है।जो कोरोना काल में लिखा गया है। मैंने आपदा को अवसर में बदला।इससे पहले दो कहानी संग्रह सबक़ तथा लीला प्रकाशित हो चुके हैं।मैंने अब तक 100 से अधिक कहानियाँ लिखी हैं। मैं प्रेमचंद को अपना आदर्श मानता हूँ।

अति विशिष्ट अतिथि राजेश कुमार मिश्र ने प्रेम कुमार त्रिपाठी को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बताया।

कार्यक्रम में देश के लिए प्राणों की आहुति देने वाले भारतमाता के सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस अवसर पर राजेश कुमार मिश्र, श्रीनाथ मौर्य सरस, राधेश्याम दीवाना, कुंजबिहारी लाल मौर्य ‘काकाश्री, रामचन्द् उपाध्याय श्रीमती शशी मौर्य ने अपने विचार रखे। श्रीमती माया त्रिपाठी ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।