सरकार ने मना किया तो ग्रामीणों ने खुद उठाया पौधों के संरक्षण का बीड़ा

लार-देवरिया:- विश्व पर्यावरण दिवस से लेकर वन महोत्सव तक में यूपी सरकार केवल फार्मेल्टी पूरा करती नजर आ रही है या यूँ कहें कि पौधा लगाने के नाम पर पैसे का बंदरबाट हो रहा है और पौधों के संरक्षण के लिए उसके पास ना तो कोई फंड है और ना ही उपाय।बस हर साल करोड़ो पौधे लगाकर सरकार अपनी पीठ तो थपथपा ले रही है लेकिन जमीनी हकीकत देखें तो हजार पौधों में से एक भी पौधे जीवित नहीं बच पा रहे हैं।इसका ताजा उदाहरण इस साल ग्राम सभा कौसड़ में देखने को मिला जहाँ सचिव द्वारा ग्राम प्रधान को कम से कम 300 पौधे लगवाने की बात कही गई लेकिन जब प्रधान ने पौधे के संरक्षण के बारे में पूछा तो सचिव साहब ने मना कर दिया गया कि सरकार के पास ऐसा कोई फंड नहीं है आप बहुत कर सकते हैं तो कुछ मनरेगा मजदूर की पौधों पर ड्यूटी लगा सकते हैं।ग्राम प्रधान को यह बात नहीं जमीं।उन्होंने तुरंत अपने मीडिया सलाहकार प्रसेन जीत सिंह के सामने बात रखी तो उन्होंने गाँव के एक भामाशाह व्यक्ति से कहा जो पौधों के साथ उनके संरक्षण के लिए लोहे की जाली डोनेट किया जिसके तहत ग्राम सभा के प्राइमरी स्कूल, छठ घाट, श्मशान भवन के आस-पास 21 पीपल,बरगद,नीम, पाकड़ और गूलर के सनातनी पौधे लगाये गए और साथ ही उनको जाली से तुरंत संरक्षित भी किया गया।यह पुनीत कार्य रमेश यादव ने अपनी दादी माँ के स्मृति में किया जिसमें मुख्य भूमिका में प्रसेन जीत सिंह,ग्राम प्रधान रामनारायण यादव,प्रेम प्रकाश सिंह हैं।अन्य सहयोगियों में कमलेश सिंह,वीर बहादुर सिंह,अनिकेत सिंह,कुंती देवी(पुर्व प्रधान )बीरवल यादव,पप्पू सिंह,रमेश कुमार गोड़ इत्यादि का योगदान रहा।