शवों से कफन हटाए जाने के अमानवीय कृत्य पर दोषियों पर हो कानूनी कार्रवाई- प्रमोद तिवारी

सीडब्लूसी मेंबर ने वैक्सीनेशन कार्यक्रम मे भी प्रदेश मे शिथिलता व धीमी गति पर जताई नाराजगी

फोटो- पीपी, प्रमोद तिवारी।

लालगंज प्रतापगढ़। केन्द्रीय कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य तथा आउटरीच एण्ड कोआर्डिनेशन कमेटी के यूपी प्रभारी प्रमोद तिवारी ने महामारी से मरने वाले निर्दोष लोगों के शवों से अब पुलिस द्वारा कफन तक हटाए जाने के कृत्य को पूरी तरह से मानवीय संवेदना को हिला देने वाला घिनौना कृत्य करार दिया है। प्रमोद तिवारी ने कहा है कि इधर खाकी की उपस्थिति में दफनाई गई लाशों के ऊपर से चुनरी तथा चादर और शवो पर डाले गये वस्त्र हटाते हुए प्रदेश में सरकार मौत के आंकडे को कम दर्शाने का गुनाह कर रही है। उन्होनें कहा कि प्रत्येक धर्म की परंपरा तथा भारतीय संविधान और कानून के तहत हर पार्थिव शरीर को उसके धर्म के अनुसार सम्मान दिये जाने का प्राविधान है। बकौल प्रमोद तिवारी पार्थिव शरीरों का निरादर करने वाले दोषियों पर गुनाह छिपाने के लिए कानूनन कार्रवाई होनी चाहिये। मंगलवार को यहां मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से जारी विज्ञप्ति में सीडब्लूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने भाजपा सरकार पर तल्ख आरोप लगाया है कि वह अपने कार्यकाल में परम्पराओं तथा संस्कृति और मर्यादाओं तक को नकार रही है। उन्होनें कहा कि यह बेहद दुखद है कि जीते जी तो लोगों को अस्पतालों मे न तो बेड मिले और न ही समुचित इलाज मिल सका और अब शवों को उनके धर्म के रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार करने के लिए संसाधन भी मुहैया नही हो पा रहा है। श्री तिवारी ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया में कहा है कि दफनाए गए शवों के ऊपर से कफन इसलिये हटाए जा रहे है ताकि शवों की संख्या गिनी न जा सके। उन्होने कहा कि सूबे की सरकार का यह कृत्य मौतों की संख्या की विकरालता को ढकते हुए सरकार की छवि खराब न होने के लिए अमानवीय हथकण्डा भी ठहराया है। उन्होनें केंद्र की मोदी सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा यूपी में वैक्सीनेशन कार्यक्रम की शिथिलता और धीमी गति पर भी नाराजगी जताई है। श्री तिवारी ने सरकार से वैक्सीनेशन मे तीव्रता लाने के साथ महामारी से बचाव के लिए कथनी और करनी के फर्क से भी बाहर आने की नसीहत दी है। उन्होनें कहा कि यूपी में भाजपा की सरकारें हैं ऐसे मे डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद भी वैक्सीनेशन मे शिथिलता चिंतनीय है। सीडब्लूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने यूपी में पैतालिस वर्ष से अधिक आयु के लोगों की पहली डोज का औसत 19.5 प्रतिशत को भी अफसोसजनक ठहराते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय औसत 32.3 प्रतिशत से भी कम है। बतौर उदाहरण उन्होनें प्रदेश के कन्नौज, हरदोई तथा लखीमपुर खीरी, प्रतापगढ़ में भी वैक्सीनेशन के प्रतिशत कम होने पर चिंता जताते हुए सरकार से वैक्सीनेशन कार्यक्रम मे तेजी लाए जाने को कहा है। श्री तिवारी ने प्रदेशवासियों के जीवन को सुरक्षित करने के लिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम को सरकारी स्तर पर गंभीरता से संचालित किये जाने पर भी जोर दिया है।नोट- इस समाचार को प्रमोद तिवारी की पीपी फोटो सहित प्राथमिकता पर लिये जाने का अनुरोध है।
शवों से कफन हटाए जाने के अमानवीय कृत्य पर दोषियों पर हो कानूनी कार्रवाई- प्रमोद तिवारी
सीडब्लूसी मेंबर ने वैक्सीनेशन कार्यक्रम मे भी प्रदेश मे शिथिलता व धीमी गति पर जताई नाराजगी
फोटो- पीपी, प्रमोद तिवारी।
लालगंज प्रतापगढ़। केन्द्रीय कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य तथा आउटरीच एण्ड कोआर्डिनेशन कमेटी के यूपी प्रभारी प्रमोद तिवारी ने महामारी से मरने वाले निर्दोष लोगों के शवों से अब पुलिस द्वारा कफन तक हटाए जाने के कृत्य को पूरी तरह से मानवीय संवेदना को हिला देने वाला घिनौना कृत्य करार दिया है। प्रमोद तिवारी ने कहा है कि इधर खाकी की उपस्थिति में दफनाई गई लाशों के ऊपर से चुनरी तथा चादर और शवो पर डाले गये वस्त्र हटाते हुए प्रदेश में सरकार मौत के आंकडे को कम दर्शाने का गुनाह कर रही है। उन्होनें कहा कि प्रत्येक धर्म की परंपरा तथा भारतीय संविधान और कानून के तहत हर पार्थिव शरीर को उसके धर्म के अनुसार सम्मान दिये जाने का प्राविधान है। बकौल प्रमोद तिवारी पार्थिव शरीरों का निरादर करने वाले दोषियों पर गुनाह छिपाने के लिए कानूनन कार्रवाई होनी चाहिये। मंगलवार को यहां मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से जारी विज्ञप्ति में सीडब्लूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने भाजपा सरकार पर तल्ख आरोप लगाया है कि वह अपने कार्यकाल में परम्पराओं तथा संस्कृति और मर्यादाओं तक को नकार रही है। उन्होनें कहा कि यह बेहद दुखद है कि जीते जी तो लोगों को अस्पतालों मे न तो बेड मिले और न ही समुचित इलाज मिल सका और अब शवों को उनके धर्म के रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार करने के लिए संसाधन भी मुहैया नही हो पा रहा है। श्री तिवारी ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया में कहा है कि दफनाए गए शवों के ऊपर से कफन इसलिये हटाए जा रहे है ताकि शवों की संख्या गिनी न जा सके। उन्होने कहा कि सूबे की सरकार का यह कृत्य मौतों की संख्या की विकरालता को ढकते हुए सरकार की छवि खराब न होने के लिए अमानवीय हथकण्डा भी ठहराया है। उन्होनें केंद्र की मोदी सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा यूपी में वैक्सीनेशन कार्यक्रम की शिथिलता और धीमी गति पर भी नाराजगी जताई है। श्री तिवारी ने सरकार से वैक्सीनेशन मे तीव्रता लाने के साथ महामारी से बचाव के लिए कथनी और करनी के फर्क से भी बाहर आने की नसीहत दी है। उन्होनें कहा कि यूपी में भाजपा की सरकारें हैं ऐसे मे डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद भी वैक्सीनेशन मे शिथिलता चिंतनीय है। सीडब्लूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने यूपी में पैतालिस वर्ष से अधिक आयु के लोगों की पहली डोज का औसत 19.5 प्रतिशत को भी अफसोसजनक ठहराते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय औसत 32.3 प्रतिशत से भी कम है। बतौर उदाहरण उन्होनें प्रदेश के कन्नौज, हरदोई तथा लखीमपुर खीरी, प्रतापगढ़ में भी वैक्सीनेशन के प्रतिशत कम होने पर चिंता जताते हुए सरकार से वैक्सीनेशन कार्यक्रम मे तेजी लाए जाने को कहा है। श्री तिवारी ने प्रदेशवासियों के जीवन को सुरक्षित करने के लिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम को सरकारी स्तर पर गंभीरता से संचालित किये जाने पर भी जोर दिया है।