सहालग में जरूरत के सामानों की खरीददारी में भी हलाकान हैं वर-वधू के परिजन

लालगंज, प्रतापगढ़। कोरोना लॉकडाउन के चलते सहालग में अब पहले से तय शादी विवाह को लेकर लोग खरीददारी के लिए परेशानी मे देखे जा रहे है। लाकडाउन के कारण ज्यादातर बड़े प्रतिष्ठानों के शटर बंद है। वहीं शाम से लेकर सुबह और दिन में भी पुलिस का बाजारों मे सख्त पहरा है। लगन को देखते हुए लोगों ने इस बार भी पहले से ही शादियां तय कर ली थी। अब शादी को लेकर लोग कपड़े तथा मिठाई व किराना से जुड़े सामानों की खरीद के लिए भटक रहे है। कोरोना के कारण ज्यादातर मांगलिक कार्यक्रमों मे भी दोना और पत्तल का खाने पीने में प्रयोग हो रहा है। ऐसे में दोना व पत्तल के लिए भी लोग गांव से शहर तक हलाकान हो उठे है। दूध की सप्लाई भी कोरोना कर्फ्यू में कम हो गयी है। ऐसे में दूध तथा खोआ व पनीर के लिए भी लोग मंसूराबाद मण्डी से भी निराश देखे जा रहे है। वहीं परेशानी को देखते हुए कुछ शादियों को बढ़ा भी दिया गया है। ऐसे में इन तारीखों पर टेण्ट तथा बिजली व साज सज्जा की बुकिंग भी निरस्त हो गयी है। इसके चलते इनसे जुड़े कारोबारी भी निराश देखे जा रहे है। बाजार में दूध का पैकेट नियमित ग्राहकों की खरीददारी तक के लिए कम पड़ रहा है। ऐसे मे शादी विवाह के लिए तो दूध व खोआ, पनीर की उपलब्धता को लेकर स्थानीय दुकानदारों ने हाथ खड़े कर दिये है। कोरोना लाकडाउन के कारण सहालग के उत्सव भी फीके हो उठे है। इष्ट मित्र को तो छोडिए लाकडाउन ने परदेश में रहने वाले रिश्तेदारों को भी इन कार्यक्रमों से लगभग महफूज कर रखा है। फिलहाल लोग पहले से तय शादियां किसी तरह सम्पन्न कराने में गर्मी और कोरोना की तपिश से बेपरवाह दिन-रात एक किये हुए नजर आ रहे है।

 

 

रामपुरखास में पंचायत चुनाव में भाजपा कांग्रेस की जीत के अंतराल में ही आधे से रह गई कम…

लालगंज, प्रतापगढ़। जिला पंचायत चुनाव में अपने गढ़ में पंाच-पांच रिकार्ड मतों से जीती सीटों को लेकर रामपुरखास आखिर क्यों न इतराये। दिग्गज प्रमोद तिवारी और कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना के बेजोड़ नेतृत्व में कांग्रेस ने रामपुर संग्रामगढ़ से तो जिले भर में जीत के रिकार्ड में टॉप का सेहरा अपने नाम किया है। तो वहीं रामपुरखास में पांच सीटों पर जीती कांग्रेस की जीत का अंतराल ही पचीस हजार से अधिक की स्थिति में पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा करने में सफल रही है। जीत के अंतराल को ही देख लें तो सियासत की गैलरी खुली जुबान से यह कहती सुनती देखी जा रही है कि रामपुरखास में कांग्रेस के जीत के अंतराल के आधे से भी कम की स्थिति में भी सत्तारूढ़ दल भाजपा को वोट नसीब नही हो सके। जिला पंचायत के चुनाव में भाजपा की दुर्गति प्रमोद तिवारी की उनके गढ़ में घेराबंदी का ख्वाब विधानसभा चुनाव के पहले ही धरा का धरा रह गया है। सियासी गैलरी तो यह भी कहने और मानने लगी है कि पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने जनता के बीच एक उबाऊ उम्मीदवार देकर ही अपनी लोकप्रियता के ग्राफ गिरने का खामियाजा भुगता था। जिला पंचायत में कंाग्रेस की जीत ने भी इस ख्याल पर मुहर लगा दिया है कि अगर पार्टी ने कांग्रेस की केन्द्रीय कार्यसमिति के मौजूदा सदस्य प्रमोद तिवारी पर लोकसभा चुनाव में अपना दांव आजमाया होता तो कांग्रेस के लिए दिल्ली की संसद बेल्हा से मुफीद साबित हो सकती थी। रामपुर संग्रामगढ़ से कांग्रेस उम्मीदवार रघुनाथ सरोज ने रिकार्ड तेरह हजार चार सौ अटठावन मत प्राप्त कर भाजपा को मात्र तीन हजार सात सौ छियालिस पर सिमटा दिया। रघुनाथ की जीत का अंतर दहाई के करीब यानि नौ हजार सात सौ बारह पर आई है। वहीं इसी विकासखण्ड से ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष लालजी यादव ने भी आठ हजार चार सौ पैतींस मत पाकर भाजपा को एक हजार नौ सौ अटठान्वें मतों से करारी शिकस्त दी। सांगीपुर की वह सीट जिस पर जिले भर के लोगों की नजर लगी थी और बीजेपी के मौजूदा सांसद से लेकर उसके हर घटक ने चुनाव प्रचार में सर्वस्व लगा रखा था। इस सीट पर कांग्रेस की गीता द्विवेदी ने पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह की पुत्री व भाजपा उम्मीदवार तनुश्री को सात हजार एक सौ पन्द्रह मतों से कड़वी हार का कभी न भूलने वाला तीखा स्वाद चखाया है। तनुश्री को गीता के तेरह हजार सात सौ बारह के मुकाबले आधे से भी कम छः हजार सात सौ उन्यासी मतों पर ही संतोष करना पड़ा। वहीं सांगीपुर से प्रमोद मोना समर्थित ममता परिहार ने भी नौ हजार एक सौ चौवालिस मत लेकर भाजपा की साबित्री को चार हजार पचहत्तर मतों से परास्त कर भाजपा के मंसूबे को तार-तार कर दिया। सांगीपुर से ही भानुमती ने भी पांच हजार सात सौ तैतालिस मत प्राप्त कर निर्दलीय निकटतम को ढाई हजार से अधिक मतों से भी पराजित किया। भाजपा यहां किस निचले पायदान पर आ खड़ी हुई इसका अभी आकलन ही हो रहा है। यही नहीं लालगंज से सुन्दरलाल पटेल की जीत की भी जनमानस में बुधवार को चर्चा रामपुरखास के नेतृत्व की समतापरक इंसाफ के फैसले की बुलंदी में परदे के पीछे आंका जा रहा है। इस तरह जिला पंचायत के चुनाव में गढ़ रामपुरखास ने भाजपा का जिस तरह से सियासी मर्दन किया है उससे जिला पंचायत के चुनाव को सेमीफाइनल का नारा देने वाली पार्टी सूनसान दरबे में हार की पीड़ा पर कहीं लेप लगाती ही दिख रही है। चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि रामपुरखास में प्रमोद तिवारी की अगुवाई में विधायक आराधना मिश्रा मोना के नेतृत्व को चुनौती देना तो दूर हाण्डी में एक भी दाल पका पाना अभी कोसों दूर का बंद आंखो का सपना मात्र हो सकता है।