कोरोना काल में पर्यावरण सेना का ऑक्सीजन बैंक योजना साबित हो रही वरदान

 

पर्यावरण सेना द्वारा जनपद प्रतापगढ़ और अन्य जिलों सहित महाराष्ट्र,बिहार और दिल्ली राज्यों में भी ऑक्सीजन बैंक की 500 से अधिक शाखाएं हुई स्थापित

 

प्रतापगढ़ । पर्यावरण संरक्षण एवं धरती पर प्राणवायु बनी रहे,इस उद्देश्य से पर्यावरण सेना भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद और पीपल जैसे बड़े वृक्षों को समाज के सहयोग से संरक्षित कर गांव और गली-मुहल्ले में ऑक्सीजन बैंक की स्थापना कर लोगों को शुद्ध ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।ऑक्सीजन बैंक की शाखा और समृद्ध व सम्पन्न हो इसके लिए ऑक्सीजन समृद्धि योजना चलाकर जन भागीदारी को बढ़ाते हुए उन्हें वृक्षों से जोड़कर जीवन में पेड़ों के महत्व को समझाते हुए उन्हें जागरुक किया जाता है और लोगों को अन्य प्रजाति के पौधों का रोपण कर वृक्षों को ना काटने और उन्हें संरक्षण देने हेतु प्रेरित किया जाता है।विगत दो वर्षों से पर्यावरण सेना ने यह अभियान चलाकर अभी तक पूरे देश में 500 से अधिक जिसमें पीपल बरगद के वृक्षों का संरक्षण कर ऑक्सीजन बैंक की स्थापना की जा चुकी है। पर्यावरण सेना द्वारा ऑक्सीजन बैंक की पहली शाखा सदर ब्लॉक के संसारपुर गांव में दो वर्ष पहले स्थापित की गई।इसके बाद लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए पर्यावरण सेना से जुड़कर भविष्य के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने हेतु गांव गांव वृक्षों का संरक्षण करके ऑक्सीजन बैंक की स्थापना करने में जुट गए।इस समय कोरोना काल में जहां लोगों को जिंदगी जीने के लिए ऑक्सीजन पाने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है वहीं ऑक्सीजन बैंक लोगों को स्वस्थ जीवन देते हुए प्राणवायु को निर्बाध रूप से जीवन को बेहतर बनाने में पर्यावरण सेना का ऑक्सीजन बैंक योजना वरदान साबित हो रही है।

ऑक्सीजन बैंक के संस्थापक एवं पर्यावरण सेना प्रमुख अजय क्रांतिकारी ने बताया कि 05 वर्ष से अधिक उम्र का एक पीपल का वृक्ष एक घंटे में 1712 किलोग्राम ऑक्सीजन देता है और 2252 किलोग्राम प्रति घंटे की दर से कार्बन डाई ऑक्साइड सोखता है।आगे उन्होंने बताया कि धरती पर पीपल ही एक ऐसा वृक्ष है जो कि 24 घंटे ऑक्सीजन देता है।बाकी वृक्षों में बरगद, नीम, तुलसी और गूलर 20 घंटे ऑक्सीजन देते हैं। ऑक्सीजन बैंक की स्थापना योजना में नमन कुमार तिवारी, रवि प्रकाश मिश्र एवं पर्यावरण सेना महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष धनंजय तिवारी का विशेष योगदान रहा।