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… तो क्या गुम होने लगी है कालाकांकर राजघराने की सियासत की जमीन

जिला पंचायत चुनाव में राजघराने को मिली करारी शिकस्त, पूर्व सांसद रत्ना सिंह की और उभरा सियासत की पारी में दयनीय मुकाम

लालगंज, प्रतापगढ़। जिला पंचायत के चुनाव में मिले नतीजे से कांग्रेसी गढ़ की सियासी जमीन को प्रमोद तिवारी व आराधना मिश्रा मोना की मुटठी मे ही मजबूती से टिके रहने का आभास भी साफ हुआ है। वहीं सांगीपुर में जिला पंचायत सीट से एक राजघराने ने पंचायत चुनाव की दहलीज पर पहली पारी मे ही जिस तरह से मुंह की खाई है उससे लोगों मे अब इस पुराने राजघराने की गुम होती सियासत की चर्चा जोरों पर आ पहुंची है। राजघराने से ही प्रमोद तिवारी के मजबूत संबल के सहारे तीन तीन बार कांग्रेस से सांसद का रसूख रखने वाली पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह ने लोक सभा चुनाव में शिकस्त खाने के बाद भाजपा का दामन थाम लिया। राजघराने को प्रमोद तिवारी की ताकत का एहसास भी उसके जहन से कम होता गया। सियासत मे आया राम गया राम की परम्परा भी पुरानी ही है। भाजपा का दामन थामने के बाद पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह को लगा कि वह अब सत्ता की ताकत के सहारे कभी अपने ही सियासी महारथी प्रमोद तिवारी की आसानी से घेराबंदी कर लेगीं। सो जिला पंचायत की अठेहा सीट से भाजपा से पूर्व सांसद रत्ना सिंह की पुत्री तनुश्री को मैदाने जंग में उतारा गया। नामांकन से लेकर मतदान के आखिरी दिन तक राजघराने का पूरा कुनबा अठेहा क्षेत्र में दरवाजे दरवाजे दस्तक देता रहा। राजघराने ने दिनरात एक कर दिया। इधर दिग्गज प्रमोद तिवारी ने आधा दर्जन से भी कम जनसभाओं के बीच ही राजघराने के मंसूबे पर ब्रेक लगा दिया। चुनाव परिणाम आने के बाद जिस तरह से एकतरफा जनादेश वह भी प्रचण्ड जनादेश प्रमोद तिवारी व विधायक आराधना मिश्रा मोना के नाम आया है उससे तो बडे बड़ों की बोलती बंद हो उठी दिख रही है। राजघराने की यह दयनीय दशा तब सामने आयी है जब कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना पंचायत चुनाव में अठेहा क्षेत्र में निकली ही नही। सिर्फ पिता प्रमोद के भरोसे मोना ने भाजपा के किले को ध्वस्त कर दिया। कांग्रेस के इस सीट पर बढे दबदबे को देखकर विरोधी खेमा अब आने वाले विधानसभा चुनाव में भी भारी नुकसान के संकेत से गुमसुम दिख रहा है। वहीं चर्चा है कि प्रमोद तिवारी के नेतृत्व मे तीन तीन बार पार्टी से सांसद चुनीं जाने वाली राजकुमारी रत्ना सिंह जिले में सियासत की अब सबसे दयनीय मुकाम पर पहुंच गई हैं। सियासी गैलरी मे तो अप्रत्यक्ष रूप से जिला पंचायत के इस नतीजे ने देश में आखिरी सांस तक केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री बनाए रखने का रिकार्ड रखने वाले कालाकांकर राजभवन की सियासत की पारी का लगभग यहीं से अन्त भी आंका जा रहा है। वहीं इन नतीजों ने यह भी बयां कर दिया है कि रामपुरखास मे जनता की पसन्द राजों-महराजों का रसूख नहीं प्रमोद तिवारी के चार दशक से विधायक बेटी आराधना मिश्रा मोना के साथ काम के नाम का ही है। सियासी तस्वीर आज जो बोल रही है रामपुरखास के विपक्षी खेमे में वहां किसी शायर की शायरी… कहां इक चिराग भी मयस्सर नहीं शहर के लिए की गंूज कांग्रेसियों की जीत के आलम में बड़ी हार का रह रहकर टीस भी दे गई है।