आजमगढ़ । पूर्वांचल के मालवी कहे जाने वाले शिक्षा शास्त्र विषय की पितामह डॉ मातबर मिश्र का हृदय गति रुकने से बुधवार को निधन हो गया था । निधन की सूचना से पूरे पूर्वांचल के साथ ही साथ ही पूरे क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर है, शुक्रवार को पूर्वांचल पीजी कॉलेज सुंदरपुर रानी की सराय (गोबरही) में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया । जिसमें तमाम शिक्षाविद, समाजसेवी व शिक्षकों ने भाग लिया । स्वर्गीय डॉक्टर मातबर मिश्र के जीवन पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय डॉक्टर मातबर मिश्र जीवन भर शिक्षा की अलख जगाते रहे । वक्ताओं ने कहा कि डॉक्टर मातबर मिश्र जौनपुर स्थित राज डिग्री कॉलेज से B.Ed विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त होने के बाद अपने गांव सुंदरपुर में पूर्वांचल पीजी कॉलेज की स्थापना किया । और लोगों को शिक्षा देने के साथ ही साथ ही समाज की सेवा में करने में जुटे रहे । वक्ताओं ने कहा कि डॉ मातबर मिश्र शिक्षाविद, समाजसेवी, साहित्य सेवी रहे वहीं डॉक्टर मिश्र विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों की भी स्थापना किया । जिसमें आज हजारों की संख्या में छात्र शिक्षा लेकर क्षेत्र के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं । डॉ मातबर मिश्र पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यक्र के समन्वयक, प्रौढ़ शिक्षा की डायरेक्टर के साथ ही राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा दो बार राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कृत हुए थे । डॉ मिश्रा का लगाव हमेशा साहित्यकारों, शिक्षकों, समाजसेवियों से रहा । इसी का नतीजा था कि डॉक्टर मिश्र हर वर्ष अपने पीजी कॉलेज पर भव्य आयोजन कर साहित्यकारों, समाजसेवियों व शिक्षाविदों को सम्मानित करने का भी कार्य करते थे । वक्ताओं ने कहा कि डॉक्टर मित्र भले ही हमारे बीच नहीं हैं । लेकिन उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को हमारी पीढ़ी कभी भूल नहीं पाएगी । कहा कि डॉक्टर मातबर मिश्र ने शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य कर दिया । शायद आने वाले दिनों में इसकी भरपाई कोई नहीं कर पाएगा । उनके पुत्रगण वरिष्ठ साहित्यकार पंकज कुमार मिश्र, समाजसेवी डॉ पवन मिश्र, बड़े पुत्र धीरज मिश्र, अजय मिश्र, प्रतीक मिश्र, प्रवीण मिश्र सभी उनके जाने से दुःखी दिखे। श्रद्धांजलि देने वालों में डॉ बिपिन दुबे, दुर्गा प्रसाद शर्मा, डॉ उमेश पाण्डेय, डॉ नीलम रॉय, मनिंदर सिंह, सर्वेश यादव, संजय यादव, अभय रॉय आदि उपस्थित रहे।