मोदी सरकार की गलत नीतियों से कोरोना महामारी का अभूतपूर्व संकट गहराया- प्रमोद तिवारी

 

सी.डबल्यू.सी. मेम्बर ने सरकार से कोरे आष्वासन को बंद कर गरीब को साढ़े सात हजार प्रति माह मदद की शुरूआत तथा महमारी से बचाव के लिये सरकार से खजाना खोलने की उठायी मांग

 

लालगंज, प्रतापगढ़। केन्द्रीय कांगे्रस वर्किंग कमेटी के सदस्य तथा आउट रीच एण्ड को-आॅर्डिनेषन कमेटी, उत्तर प्रदेष के प्रभारी प्रमोद तिवारी ने कहा है कि मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण देष आज कोरोना महामारी के अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने सर्वाेच्च न्यायालय की ताजा न्यायिक टिप्पणी की चर्चा करते हुये कहा कि सुप्रीम कोर्ट तक को आज कहना पड़ गया कि देष में कोरोना को लेकर राष्ट्रीय आपातकाल जैसे हालात बन गये है। शुक्रवार को मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाष शुक्ल के हवाले से यहांॅ जारी विज्ञप्ति सी.डबल्यू. सी. सदस्य प्रमोद ने कहा कि स्थिति यह है कि देष भर के अस्पतालों में न तो बेड है और न ही दवायें उपलब्ध है। श्री तिवारी ने कहा कि सरकारी तंत्र की असफलता से आज बाजार में भी जिस तरह से नकली दवायें भरी पड़ी हैं, यह सबसे खतरनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है । श्री तिवारी ने कहा कि महामारी को देखकर यह साफ हो गया है कि आजाद भारत में ऐसे दुर्दिन कभी नही देखने पड़े थे । उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा चिन्ताजनक स्थिति यह उत्पन्न हो गयी है कि अस्पतालों तक में हवा (आॅक्सीजन) का संकट पैदा हो गया है। प्रमोद तिवारी ने साफ कहा कि आॅक्सीजन का संकट सिर्फ इसलिये आया है क्योंकि आपदा में अवसर ढंूूॅढ़ने वाली केन्द्रीय सरकार ने कई देषों को दोगुना आॅक्सीजन निर्यात कर दिया है । श्री तिवारी ने सरकार से सवाल उठाया कि आखिर राष्ट्रहित के खिलाफ यह निर्णय किसने, क्यों, और किसके दबाव में लिया गया है ? कांगे्रस वर्किंग कमेटी के सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार बताये कि यूरोप और अमेरिका में कोरोना की दूसरी लहर आ रही थी, और स्वयं हमारे देष के वैज्ञानिक कोरोना की दूसरी लहर आने की चेतावनी दे रहे थे, तो फिर देष के लिये घातक इस निर्यात की अनुमति क्यों दी गयी ? बकौल प्रमोद तिवारी वह भी 10- 20 प्रतिषत नहीं, बल्कि सामान्य से ‘‘दोगुना’’ निर्यात किया गया । उन्होंने कड़े अंदाज में कहा कि पैसा कमाने की हवष ने केन्द्र सरकार के आंॅखों पर पट््टी बांॅध दी , और यह निर्मम व क्रूर कदम उठा लिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने ठीक ही कहा है कि यह लापरवाही नहीं बल्कि हत्यायें हैं’’ । श्री तिवारी ने कहा है कि आज देष में 3 लाख 32 हजार 503 कोरोना संक्रमित मरीज पाये गये है जो दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा रिकाॅर्ड है। उन्हांेने यह भी कहा कि आज तक कभी भी किसी देष में एक दिन में इतने कोरोना संक्रमित मरीज नहीं मिले हैं, सबको मालूम है कि यह आंॅकड़े पूरी तरह सही नहीं हैं क्योंकि बहुत से लोग टेस्ट नहीं करा रहे हैं, और जो करा रहे है उन्हें बहुत लम्बी लाइन में लगना पड़ रहा है। सी.डबल्यू.सी. सदस्य प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री के निर्णय से आज देष हतप्रभ है, देष में ‘‘वैक्सीन’’ पूरी तरह उपलब्ध नहीं है, और प्रधानमंत्री पष्चिम बंगाल के चुनाव के लिये बांग्लादेष को वैक्सीन बांॅट आये, यही नहीं पाकिस्तान और नैपाल सहित दुनिया के कई देषों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन दे दिया। श्री तिवारी के मुताबिक सरकार ने अविवेकपूर्ण ढंग से 82 से अधिक देषों को वैक्सीन निर्यात करने की अनुमति दे दी। उन्होंने तल्ख अंदाज में दी गयी प्रतिक्रिया के तहत कहा कि देष में चाहे वैक्सीन हो अथवा आॅक्सीजन की कमी हो, दोनों परिस्थिति में राष्ट्रीय आवष्यकता से ऊपर चन्द पंूॅजीपतियों को पैसा कमाने की छूट दे दी । सी.डबल्यू.सी. मेम्बर प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री से साफ कहा है कि अब वह देष को ‘‘कोरे आष्वासन’’ देना बन्द करें, वहीं श्री तिवारी ने पी.एम. से प्रत्येक गरीब को कम से कम रु. 7500 (सात हजार पांॅच सौ रुपये) प्रतिमाह आजीविका चलाये जाने के लिये दिये जाने पर जोर दिया। इसके तहत श्री तिवारी ने सुझाव दिया है कि इस मदद से गरीब अपने घर में रहे और जीविकोपार्जन के लिये उसे बाहर न निकलना पड़े। उन्होंने सरकार से मध्यम वर्ग और वेतनभोगी को आर्थिक मदद की भी मांग की है। श्री तिवारी ने तंज कसा कि प्रधानमंत्री तो 20- 20 मिनट तक ‘‘राष्ट्र’’ को उपदेष देते हैं, और कुछ न कुछ करने की देषवासियों को नसीहत देते हैं, किन्तु देष के प्रधानमंत्री के रूप में स्वयं को और केन्द्र सरकार को क्या करना चाहिए ? इस संदर्भ में कुछ भी नहीं बोलते । श्री तिवारी ने यह भी कहा कि जो लोग निष्पक्ष होंगे, और जिनका राजनीति से कोई लेना- देना नहीं है उन्हें दुःख होता होगा, कि पिछले 7 सालों में आपने कैसा ‘‘भारत’’ बना दिया है ? प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह अत्यंत दुःखद है कि श्मषान घाट पर लाषों का अंबार लगा है, अंतिम संस्कार के लिये लोगों को ‘‘टोकन’’ लेकर ‘‘बारी’’ की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि इधर श्मषान घाट व कब्रिस्तान भर रहे हैं, और दूसरी तरफ पी.एम. पष्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री पद के दायित्व और गरिमा को भूलकर भारतीय जनतापार्टी के प्रचारक के रूप में कटाक्ष और अट््टहास कर रहे हैं। श्री तिवारी ने कहा कि चुनाव के लिये पी.एम. तथा भा.ज.पा. के नेता रैलियों में कोरोना नियमों की धज्जियांॅ उड़ा रहे हैं । पी.एम. को आड़े हाथों लेते हुये श्री तिवारी ने यह भी कहा कि वह तो देषवासियों को नसीहत देते हैं कि ‘‘दो गज की दूरी- और मास्क है जरूरी’’। किन्तु स्वयं और केन्द्रीय मंत्री अमित शाह की चुनावी रैली की कोई एक तस्वीर दिखा दें जिसमें स्वयं मोदी अथवा अमित शाह अपनी जनसभाओं में श्रोताओं से इसका पालन कराया हो । प्रमोद तिवारी ने तो यहांॅ तक कहा है कि पी.एम. के सामने सरकार की नसीहत का ‘‘जनाजा’’ निकलता रहा, और भीड़ द्वारा नसीहत तोड़ने के भागीदार स्वयं बन रहे हैं । श्री तिवारी ने कहा कि आजाद भारत में क्या कभी सोचा गया था कि मोदी जी आप देष को इस मोड़ पर लायेंगे । वहीं श्री तिवारी ने कहा कि कृृपा करके प्रधानमंत्री अब यह न बोल दें कि आबादी के हिसाब से औरों से बेहतर कर रहे हैं क्योंकि अब यह भी झूॅठा साबित हो गया है । श्री तिवारी ने प्रधानमंत्री से विनम्र अपील की है कि वह अपना और अपने राजनैतिक दल के स्वार्थ को छोंड़कर भारत देष को, और भारत वासियों को बचाने के लिये केन्द्र सरकार के खजाने को खोल दें । प्रमोद तिवारी ने पी.एम. मोदी से पंूॅछा है कि जब पहली बार कोरोना की लहर आयी थी तो यह बोल गये कि देष और केन्द्र सरकार कोरोना से निपटने को तैयार नहीं था जबकि कोरोना च्ीन और अमेरिका में 6 माह पहले अपना पैर पसार चुका था। किन्तु कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बींच 14 माह में देष को कोरोना महामारी से बचाने के लिये सरकार ने क्या किया ? उन्होंने यह भी पंूॅछा है कि वैक्सीन और आॅक्सीन दूसरे देषों को निर्यात करने की इजाजत दी, और आज आॅक्सीजन और वैक्सीन की कमी से हर रोज, हर क्षण, हर पल तिल- तिलकर लोगों की मौत हो रही है और देषवासी बेबस, असहाय होकर देख रहे हैं। प्रमोद तिवारी ने तंज कसा कि इस समय भी पी.एम.की भाषा ‘‘टीका उत्सव’’ मनाने की निकल रही है । श्री तिवारी ने प्रधानमंत्री से आगह करते हुये कहा कि भाषण बाजी बन्द करें, ताली- थाली बजवाना बन्द करें, टाॅर्च, मोमबत्ती और दिया जलवाना बन्द करें देष के वैज्ञानिकों की सलाह से देषवासियों को किसी तरह तो इस संकट से बचायें।