मनाही के बावजूद बीजेपी पूर्व सांसद ने उड़ाई आचार संहिता की धज्जियां, आक्रोश

बेटी के निर्वाचन क्षेत्र में बूथ के अंदर पूर्व सांसद को देख खफा हुए अफसर, बैरंग लौटी पूर्व एमपी रत्ना

फोटोः 04 बूथ के अंदर मतदाताओं से मिलती पूर्व संासद रत्ना।

फोटो: 05 सांगीपुर के लखहरा बूथ पर पूर्व सांसद रत्ना सिंह की मौजूदगी पर सवाल उठाते अफसर।

लालगंज,प्रतापगढ़: पंचायत चुनाव केा लेकर जिला प्रशासन की भूमिका भी सवालों के बीच में आ खड़ी हुई है। सत्तारूढ़ दल से जुड़ी जिले की एक पूर्व सांसद खुले आम आदर्श आचार संहिता का उल्लघन करती दिखी। हालाकि बूथ पर प्रत्याशी के साथ पूर्व सांसद को देखकर जब विरोध का माहौल उठ खड़ा हुआ तो आनन-फानन में पहुंचे पुलिस व प्रशासनिक अफसरों ने पूर्व सांसद से नाराजगी जताते हुए उन्हें क्षेत्र छोड़ने की कड़ी नसीहत दी। जिले की सांगीपुर ब्लाक के जिला पंचायत सदस्य तृतीय वार्ड में वीजेपी की पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह की पुत्री तनुश्री कुमारी इस वार्ड से भाजपा समर्थित प्रत्याशी है। पूर्व सांसद तथा शासन से सुरक्षा प्राप्त होने के कारण जिला प्रशासन ने राजकुमारी रत्ना सिंह को चुनाव प्रचार अवधि बीतने के बाद निर्वाचन क्षेत्र से बाहर रहने को कहा था। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पूर्व सांसद ने जिला प्रशासन तथा निर्वाचन पे्रक्षक को आदेश का पालन करने के लिए लिखित भरोसा भी दिलाया था। सोमवार को मतदान के दिन पूर्व एमपी राजकुमारी रत्ना सिंह प्रशासनिक तथा निर्वाचन आयोग के आदेश को धंता बताते हुए सांगीपुर के लखहरा बूथ पर पहुंच गयी। सुरक्षा कर्मियों के साथ पूर्व सांसद को बूथ के अंदर मतदाताओं से मिलता देख काफी लोग नाराज हो उठे। इसकी शिकायत लोगों ने फोन से अफसरों को की। इस पर जिले के अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी तथा सेक्टर मजिस्ट्रेट आनन-फानन में बूथ पर पहुंचे । सेक्टर मजिस्ट्रेट ने पूर्व सांसद से उनकी मौजूदगी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। इस पर पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह ने दोबारा ऐसा न होने की बात कहकर वहां से निकल गई। हालाकि सेक्टर मजिस्ट्रेट ने उन्हें मतदान अवधि में निर्वाचन क्षेत्र से बाहर रहने की हिदायत भी दी। पूर्व सांसद की भूमिका को लेकर जिले के अफसर भी हालाकांन हो उठे। इधर सोशल मीडिया में भी पूर्व सांसद का मतदान केन्द्र के अंदर रहने व अफसरों द्वारा नसीहत भरा वीडियों वायरल हो गया। वही लोगों का यह भी कहना था कि पूर्व सांसद ने खुले आम आचार संहिता की धज्जिया उड़ाई लेकिन प्रशासन ने नसीहत का कड़वा घूट पिलाकर अपने कर्तव्यों की आखिर क्यों इतिश्री कर ली………। आम आदमी को तो लाल कार्ड थमाकर पुलिस व प्रशासन ने खूब धौस जमाई। लेकिन सत्ता से जुड़े होने के कारण वह पूर्व सांसद के खिलाफ प्रभावी कार्यवाई का साहस नही जुटा सका। जबकि जिले में छोटे मोटे वीडियों वायरल होने तथा रंचमात्र गलतियों पर तो पुलिस ने आनन फानन में जनसामान्य से जुड़े लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने में जरा भी संकोच नही किया।