लखीमपुर खीरी में हुए किसानों के नरसंहार के खिलाफ ए.आई.के.के.एम.एस(आल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन)ने मनाया काला दिवस

बिंदु वर्मा ब्यूरो चीफ 

पट्टी।लखीमपुर खीरी में किसानों के नरसंहार के मुख्य साजिशकर्ता, गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने और मुकदमा चलाने की मांग को लेकर देश भर के किसान और श्रमिक आज 3 अक्टूबर 2023 को देश भर के जिला और तहसील मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन, पुतला दहन और सार्वजनिक बैठकों के साथ काला दिवस के रूप में मना रहे हैं। इसी क्रम में किसान संगठन – ए.आई.के.के.एम.एस के कार्यकर्ताओं ने अपने कर्यालय बहेलियापुर,पट्टी से जुलूस के साथ नारे लगाते हुए उड़ैयाडीह मोड़ तिराहे पर लखीमपुर खीरी में नरसंहार के मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा उर्फ टेनी का पुतला दहन एव नुक्कड़ सभा किया गया। AIKKMS के प्रदेश उपाध्यक्ष बेचन अली ने आज किसानो को अपनी तमाम समस्याओं को लेकर जिले एवं प्रदेश स्तर पर जन कमेटी बनाने के साथ साथ एक जन आंदोलन को मजबूत करने का आवाहन किया। इस कार्यक्रम में विजयानंद तिवारी, राम समुझ मौर्य, राम सरन विश्वकर्मा,लल्लूराम पल, अखिलेश यादव, ओम प्रकाश गुप्त,छोटे लाल यादव ,अरविंद गुप्त, व अन्य लोग मौजूद रहे। ए.आई.के.के.एम.एस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगन्नाथ वर्मा ने कहा कि, संयुक्त किसान मोर्चा, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और महासंघों की ओर से 24 अगस्त 2023 को तालकटोरा स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित किसानों और श्रमिकों के अखिल भारतीय संयुक्त सम्मेलन में ही आज के दिन काला दिवस मनाने का आह्वान किया गया था। विरोध दिवस की मुख्य मांग 2021 में लखीमपुर खीरी में किसानों के नरसंहार के कथित साजिशकर्ता गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की है। मंत्री और उनके बेटे आशीष मिश्रा टेनी नरसंहार के मास्टरमाइंड थे और चार किसान नक्षत्र सिंह, गुरविंदर सिंह, लवप्रीत सिंह और दलजीत सिंह और एक पत्रकार रमन कश्यप इस हमले में मारे गए थे। यह हमला कृषि के कॉरपोरेटीकरण के उद्देश्य से तीन कॉर्पोरेट समर्थक कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान संघर्ष को दबाने के लिए भाजपा की साजिश का हिस्सा था। हालाँकि, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और फेडरेशनों के सक्रिय समर्थन से किसानों के साझे संघर्ष प्रधानमंत्री को माफी मांगने और संसद को तीन कृषि अधिनियम निरस्त करने के लिए मजबूर करने में सफल रहा था। इस ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान 735 किसान शहीद हुए।पिछले दो साल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजय मिश्रा टेनी से इस्तीफा देने या उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त करने के लिए नहीं कहा। प्रधानमंत्री किसानों की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता को बचा रहे हैं, जबकि उसका नाम एफआईआर में दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले में हस्तक्षेप करने और दोषियों को गिरफ्तार करने का निर्देश देने के बाद ही उत्तर प्रदेश में भाजपा की राज्य सरकार ने आशीष मिश्रा टेनी और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। राज्य सरकार ने निर्दोष किसानों को भी गिरफ्तार कर जेल में डाला हुआ है। यह काला दिवस मेहनतकश जनता के जनवादी आंदोलन पर दमन/हमलों की सभी घटनाओं और ऐसे दमनकारी मंसूबों का मुकाबला करने और विरोध करने के दृढ़ संकल्प के साथ उनके अधिकारों पर हमले के विरोध का भी प्रतीक है।मोदी सरकार स्वभाव से सत्तावादी रही है और उसने कुख्यात आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम लाकर न केवल रक्षा क्षेत्र बल्कि सभी संबंधित सेवाओं और यहां तक कि हड़ताल के समर्थन को भी अपराध घोषित कर दिया है।भाजपा और विभिन्न राज्य सरकारें अत्यधिक अलोकतांत्रिक हैं, दमन और आतंक फैला रही हैं और श्रमिकों, किसानों और लोगों के अन्य वर्गों के खिलाफ यूएपीए सहित कठोर कानून लागू कर रही हैं जो अपने अधिकारों और पात्रता के लिए और जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।ऐतिहासिक किसान आन्दोलन के दौरान किसानों पर लगाए गए कई झूठे मामले अभी तक वापस नहीं लिए गए हैं।केंद्रीय ट्रेड यूनियनों/फेडरेशनों और संयुक्त किसान मोर्चा मोदी सरकार की कॉरपोरेट परस्त, किसान विरोधी, मजदूर विरोधी और राष्ट्र विरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध करता है।