पितरों के खुश होने पर जीवन में आती है खुशहाली…..आजाद दुबे

धूमधाम से मनाई गई पंडित पारस नाथ त्रिपाठी की पुण्यतिथि ……

आयोजक द्वारा संस्कृत विद्वानों को किया गया सम्मानित ……

गोंई गांव में संस्कृत विद्वानों मनीषियों शिक्षकों समाजसेवियों का हुआ भव्य संगम…..

पट्टी, प्रतापगढ़।दुनिया में माता पिता की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। माता-पिता की सेवा करना हर पुत्र का धर्म है। इस दुनिया में माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं है। जीवित रहने पर माता पिता की सेवा करना और मरणोपरांत माता पिता का श्रद्धा के साथ यथाशक्ति श्राद्ध करने से पितरों को तृप्ति मिलती है। और पितृदोष से मुक्ति मिल जाती है। और पुत्र का जन्म सफल हो जाता है। ऐसा करने से पित्र प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख शांति खुशहाली का वास होता है। उक्त बातें क्षेत्र के गोई गांव में गुरुवार की देर रात्रि शिक्षा मनीषी पंडित पारस नाथ त्रिपाठी के पुण्यतिथि श्रद्धांजलि समारोह अवसर पर बोलते हुए मुख्य अतिथि पद के संस्कृत वैदिक विद्वान राजेश्वर प्रसाद दुबे आजाद ने कही।

संस्कृत वैदिक विद्वान राजेश्वर प्रसाद दुबे आजाद ने आगे कहा कि शिक्षक मनीषी विद्वान समाज का दर्पण होता है। वह समाज से कभी सेवानिवृत्त नहीं होता है। वह हमेशा अपने ज्ञान रूपी जल से समाज को सदैव सिंचित करने का कार्य करता है। संस्कृत विद्वान पंडित पारस नाथ त्रिपाठी जी मरणोपरांत समाज को एक नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। श्री दुबे ने आगे कहा कि संस्कृत मनीषियों विद्वानों की भाषा है। आज संस्कृत भाषा का क्षरण हो रहा है। संस्कृत भाषा के जीवित रहने से ही सभ्यता और संस्कार जीवित रह सकता है। विलुप्त हो रही संस्कृत को सजोने संवारने की जरूरत है। इसके लिए समाज के सभी लोगों को आगे आना चाहिए । श्री दुबे ने ऐसे भव्य कार्यक्रम के लिए आयोजक उमा कांत त्रिपाठी की भूरि भूरि प्रशंसा किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम को प्रमुख रूप से कमलेश दुबे, सभाजीत मिश्र, सुधाकर दत्त मिश्र, दयाशंकर दुबे, घनश्याम दुबे, श्याम शंकर त्रिपाठी, गौरांग दास महाराज, गंगेश शुक्ल, कृष्णकांत तिवारी, सत्य प्रकाश पांडेय, अशोक राय, सुशील कुमार दुबे, संस्कृत वैदिक विद्वानों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। आयोजक उमाकांत त्रिपाठी और आजाद दुबे के हाथों संस्कृत वैदिक विद्वानों मनीषियों को अंगवस्त्रम धार्मिक ग्रंथ नारियल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान सम्मान पाकर विद्वान गदगद हो उठे। कार्यक्रम का कुशल संचालन रामानंद ओझा और शिवेंद्र पांडेय ने किया।और अध्यक्षता रमेश प्रसाद शुक्ल ने किया। और आयोजक उमाकांत त्रिपाठी, कृष्णकांत त्रिपाठी ने आए हुए अतिथियों के प्रति बहुत-बहुत आभार ज्ञापित किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से लालता प्रसाद पांडेय, हरि शंकर त्रिपाठी, हरीश पांडेय, राम लखन मिश्र, प्रेम जी मिश्र, विकास मिश्र,रामजी दुबे, उदय राज पाठक, हीरालाल, अखिलेश मिश्र, यमुना प्रसाद त्रिपाठी, आनंद सागर, ज्ञान सागर, गंगासागर,शिक्षा मनीषी, बुद्धिजीवी, समाजसेवी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। रिपोर्ट ज्ञान सिंह संवाददाता प्रतापगढ़।