प्रभु भक्ति के बगैर निरर्थक है, मानव जीवन-मनीषकृष्ण शास्त्री

प्रभु भक्ति के बगैर निरर्थक है, मानव जीवन-मनीषकृष्ण शास्त्री

 

डभियार में मनमोहक भागवत कथा पर झूमें श्रोता

 

घुइसरनाथ धाम प्रतापगढ भगवान का उन्हीं लोगों के हृदय में वास होता है, जो सत्कर्म करते हैं। और जो सत्कर्मी होते हैं उनसे पाप, पाखंड, रजोगुण और तमोगुण दूर हो जाते हैं, परन्तु अनैतिक कार्य करने वाले चाहे जितना भी लाभ अर्जित कर लें, एक दिन उन्हें प्रायश्चित अवश्य भोगना पड़ता है। यह उद्गार डभियार गांव में लाल हरिनारायण सिंह के संयोजकत्व में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा ब्यास मनीषकृष्ण शास्त्री ने व्यक्त किया।

उन्होंने शिव विवाह, बामन अवतार आदि की कथा का संगीतमय वर्णन किया। कश्यप ऋषि व अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लेकर किस तरह श्रीनारायण ने राजा बलि से भिक्षा में तीन पग जमीन मांगी, और ढाई पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया प्रसंग का मनमोहक वर्णन किया। शिव व सती प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि शिव जी की आलोचना सुनने पर सती माता ने अपना शरीर यज्ञ कुण्ड में भस्म कर दिया।और जब शिवजी सती की देह को लेकर भ्रमण करने लगे तो नारायण के चक्र से सती माता का शरीर 51 स्थानों पर गिरा, जहां शक्ति पीठों की उत्पति हुई।कथा ब्यास ने कहा कि जीवात्म का सच्चा सम्बंध सगे सम्बंधियों से नहीं बल्कि प्रभु से होना चाहिए। वह जीवन निरर्थक है, जो मनुष्य जन्म में भी प्रभु की भक्ति न करे। कथा व्यास ने ध्रुव प्रसंग की रोचक कथा कहते हुए कहा कि ध्रुव को अपमानित करते हुए विमाता सुरुचि ने कहा पिता की गोद में अथवा सिंहासन पर स्थान पाना चाहते हो तो तुम्हें मेरे गर्भ से जन्म लेना पड़ेगा। ध्रुव ने यह बात अपनी माता सुनीति से बताई तो उन्होंने कहा कि तुम्हे उस सिंहासन को हांसिल करने की सोचना चाहिए जिसे आज तक देव, दानव, गंधर्व किन्नर, ऋषि, मुनि तक नही प्राप्त कर सके।ध्रुव प्रसंग की मार्मिक कथा पर श्रोता भक्ति में सराबोर दिखे। इस मौके पर यजमान लाल हरिनारायण सिंह ने सभी के प्रति आभार जताया।लाल राघवेन्द्र सिंह व चंदन सिंह ने सभी का स्वागत किया। इस अवसर पर गोपाल शरण सिंह, घुइसरनाथ मंदिर के प्रबंधक लाल बृजेश प्रताप सिंह, जीतबहादुर सिंह, फूलचंद्र पांडेय, त्रिभुवन नाथ तिवारी, नागेश प्रताप मिश्र, केदारनाथ मिश्र, शुभम श्रीवास्तव, बजरंग बहादुर सिंह, राकेश सिंह, रमेश बहादुर सिंह, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, लाल चंदन सिंह, कमल मिश्रा, राजकुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।

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